ओलम्पिक में पहलवान फिर दिला सकते हैं सम्मान : अमित धनखड़

भालगढ़ (सोनीपत) का चौ. देवीलाल साई सैंटर हरियाणा और दिल्ली के खिलाड़ियों के लिए अभ्यास का एक प्रमुख केंद्र है, जिसमें एथलेटिक्स,कुश्ती,बॉक्सिंग,जूडो,कबड्डी आदि खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। साई सैंटर सोनीपत के सैंकड़ों खिलाड़ी हर साल अनेक राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेते हैं, जिनमें कुश्ती के पहलवान विशेष उल्लेखनीय हैं। साई सैंटर सोनीपत में अभ्यास करने वाले कुश्ती के ऐसे ही एक अंतर्राष्ट्रीय पहलवान अमित कुमार धनखड़ से Just Play Sportz टीम ने रियो ओलम्पिक में भाग ले रहे भारतीय खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए `जीत हमारी पहचान -गो फॉर गोल्ड ' मुहिम के तहत एक मुलाकत की।

अमित धनखड़ हरियाणा के रोहतक ज़िले के गांव हुंमायूपुर के निवासी हैं, जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कुश्ती के खेल से जुड़ी हुई है और वर्तमान में वे हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। अमित कुमार 66 किलोग्राम भारवर्ग में एशियन चैंपियनशिप- 2013 के स्वर्ण पदक विजेता हैं और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप 2011 और 2013 में भी उन्होंने 66 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। 2007 लन्दन कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 66 किलोग्राम भारवर्ग में फ्रीस्टाइल और ग्रीकोरोमन दोनों में ही उन्होंने रजत पदक प्राप्त किया है तो वंही 2009 के कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने कांस्य पदक प्राप्त किया। अमित कुमार ने 2016 के साउथ एशियन खेलों में 70 किलोग्राम भारवर्ग  फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है।

Just Play Sportz टीम से बात करते हुए अमित धनखड़ ने बताया कि उनका कुश्ती का सफ़र उनके गांव के अखाड़े से शुरू हुआ, जंहा वे सुबह 4 बजे उठकर रोज़ाना अभ्यास करने जाते थे।अमित ने कहा कि कुछ समय बाद उन्होंने दिल्ली के छत्रशाल स्टेडियम में कोच सतपाल की देखरेख में अभ्यास करना शुरू किया, जिसकी बदौलत उन्हें ये सभी उपलब्धियां हासिल हुई हैं।

अपने परिवार की तरफ़ से मिले सहयोग के बारे में बात करते हुए अमित ने कहा कि उनके मामा धर्मेंद्र ,जगमेंद्र और वीरेंदर ने उन्हें बहुत प्रोत्साहित किया और उसी के कारण वह आज इस मुकाम पर है। अमित ने कहा कि एशियन चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप वह पहले ही जीत चुके हैं और अब उनका लक्ष्य ओलम्पिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना है।

सोनीपत और उसके साई सैन्टर के बारे में बात करते हुए अमित धनखड़ ने कहा कि इस इलाके के पहलवान शुरू से ही विश्व स्तर पर कुश्ती में अपना लोहा मनवाते रहें हैं, जिसके कारण यह इलाका कुश्ती में अपनी विशेष पहचान रखता है। भारतीय कुश्ती संघ के द्वारा Pro. Wrestling league शुरू करवाये जाने के फैंसले का समर्थन करते हुए अमित ने कहा कि यह एक बहुत अच्छा प्रयास है, इससे कुश्ती को बहुत बढ़ावा मिला है और इसी का परिणाम है कि Pro. Wrestling league का जो सीधा प्रसारण हुआ उसे पूरे भारत में लोगों ने देखा।

कुश्ती में अपने पसंदीदा दाव के बारे में बात करते हुए अमित धनखड़ ने कहा कि कुश्ती में दाव और तकनीक परिस्थिति के अनुसार ही लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुश्ती में पैरों का दाव सबसे अच्छा माना जाता है, वे कलाजंग दाव और धोबी दाव लगाना भी पसन्द करते  हैं। ग्रीकोरोमन और फ्रीस्टाइल कुश्ती के अंतर को स्पष्ट करते हुए अमित ने कहा कि फ्रीस्टाइल में पहलवान पूरे शरीर पर कहीं पर भी दाव लगा सकता है लेकिन ग्रीकोरोमन में कमर के ऊपर के भाग पर ही दाव लगा सकते हैं।

कुश्ती में महिलाओं की भागीदारी के बारे में बात करते हुए अमित धनखड़ ने कहा कि महिलाओं में कुश्ती को लेकर यह बहुत अच्छा संकेत है और रियो ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही तीनों महिला पहलवान बबीता फोगाट,विनेश फोगाट और साक्षी मालिक बहुत अच्छी पहलवान है, जिनसे पदक की बहुत उम्मीदे हैं। अंत में उन्होंने रियो ओलम्पिक में भाग ले रहे सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए कामना करते हुए कहा कि सभी बहुत बढ़िया प्रदर्शन करेंगे और सभी 8 भारतीय पहलवानों में से कम से कम 5-6 पहलवान पदक ज़रूर जीतेंगे।

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